बतौर पत्रकार शाहरुख़ का इंटरव्यू करना अलग तरह का अनुभव रहता है क्योंकि उनकी सूझबूझ और हाज़िरजवाबी ऐसी होती है कि वे सामने वाले से एक क़दम आगे रहते है जिससे बातचीत का लुत्फ़ और चुनौती दोनों दोगुनी हो जाती है. सर्जरी से तीन दिन पहले शाहरुख़ लंदन आए थे.लंदन में हुई इंटरव्यू में शाहरुख़ ने अपनी फ़िल्म, पुराने दोस्तों समेत कई यादों को टटोला. फ़िल्म बिल्लू की टैगलाइन है कि इट्स स्पेशल टू बी ऑर्डिनरी यानी आम होना भी बहुत ख़ास होता है. आप इस बात में यक़ीन रखते हैं? मुझे लगता है कि आम इंसान होना, आम काम करना, आम चीज़ों का शौक रखना बहुत ख़ास होता है क्योंकि कोई भी चीज़ ख़ास अपने आप पैदा नहीं होती. आम चीज़ को प्यार करें या आम तरह से ज़िंदगी जीएँ, यही चीज़ें स्पेशल बन जाती हैं. शुरुआत हर चीज़ की आम ही होती है. मैं तो यही मानता हूँ कि आम होना ज़्यादा ख़ास है क्योंकि ख़ास तो आप बाद में बनते हैं पहले तो आप साधारण ही होते हैं. बिल्लू दो दोस्तों के मिलने की भी कहानी भी है- एक आम इंसान है और दूसरा अब सुपरस्टार बन गया है. क्या आपको मौका मिलता है उन दोस्तों से मिलने का जो उस समय आपके साथ थे जब आप सुपरस्टार नहीं थे?